________________
श्री आनन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचितम् ।
ब्रह्मसूत्रभाष्यम्
श्री त्रिविक्रमपण्डिताचार्य विरचित-तत्त्वप्रदीपिकया, श्री जयतीर्थ - विरचित - तत्त्वप्रकाशिकया, श्री वादिराजतीर्थ-विरचित-गुर्वर्थदीपिका, श्रीरघूत्तमतीर्थ - विरचित-भावबोधः, श्री राघवेन्द्रतीर्थ - विरचित-भावदीपः, श्री ताम्रपर्णीश्रीनिवास - विरचित - वाक्यार्थमुक्तावली, श्री पाण्डुरङ्गि - श्रीनिवासाचार्य विरचित तत्त्वसुबोधिनी, श्रीनिवासतीर्थ - विरचित - वाक्यार्थविवरणम्, श्रीशर्कराश्रीनिवास - विरचित वाक्यार्थमञ्जरी इति सप्तटिप्पणीभिः समलङ्कृतम्
प्रथमं सम्पुटम्
(प्रथमाध्यायस्य प्रथमद्वितीयपादौ )
Edited by
Prof. K.T. Pandurangi
Formerly Prof. of Sanskrit, Bangalore University Hon. Director Dvaita Vedanta Studies and Research Foundation Upakulapati, Poornaprajna Vidyapeeta, Bangalore
1997
'द्वा सुपर्णा
द्वैतवेदानप्रतिज्ञानम्
Published by
Dvaita Vedanta Studies and Research Foundation No. 33/163, 10th B Main Road, Jayanagar I Block, Bangalore.